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अलाउद्दीन खिलजी कौन थे ?
- अलाउद्दीन खिलजी (Alauddin Khilji) खिलजी वंश का दूसरा शासक था। अलाउद्दीन खिलजी ने दिल्ली सल्तनत पर शासन किया था। अलाउद्दीन खिलजी दक्षिण भारत पर जीत हासिल करने वाला भारत का पहला मुस्लिम सुल्तान था।
- उसका साम्राज्य अफगानिस्तान से लेकर उत्तर-मध्य भारत तक फैला था। वह भारतीय इतिहास के सबसे महान मुस्लिम शासकों में से एक थे।
- अलाउद्दीन खिलजी (alauddin khilji) का शासनकाल 1296 ई. से 1316 ई. तक माना जाता है।
- दिल्ली सल्तनत के शासक अलाउद्दीन खिलजी 1299 में भारत आए थे और उन्होंने गुजरात पर हमला किया था।
- अलाउद्दीन खिलजी जलालुद्दीन खिलजी का महत्त्वाकांक्षी भतीजा और दामाद था। उसने अपने चाचा को सत्ता प्राप्त करने में मदद की थी, इसलिए उसे ’अमीर-ए-तुज़ुक’ के रूप में नियुक्त किया गया। लेकिन जुलाई 1296 में उसने अपने चाचा जलालुद्दीन खिलजी की हत्या कर दी और स्वयं गद्दी पर बैठ गया।
- इसका मूल नाम ’अली गुरशास्प’ था।
- सुल्तान बनने के पश्चात् अलाउद्दीन ने सर्वप्रथम पूर्व सुल्तान पुत्र अर्कली खाँ सहित उसके परिवार के समस्त सदस्यों का कत्लेआम किया। तदुपरान्त उसने बलबनी और जलाली अमीरों में जड़-मूल नष्ट कर दिया।
- अलाउद्दीन खिलजी ने ’खलीफा का नाइब’, सिकन्दर द्वितीय, ’सिकन्दर-ए-सानी’ आदि उपाधियाँ धारण की थी।
अलाउद्दीन के तीन छोटे भाइयों (अलमास बेग, कुतुलुग तिगीन और मुहम्मद) में से सिर्फ अलमास बेग का नाम इतिहास में मिलता है।
- अलमास बेग की उपाधि उलुग खाँ थी।
- अलाउद्दीन ने ख्वाजा खातिर को वजीर, सुगुद्दीन आरिफ को सद्रेजहाँ और साम्राज्य का मुख्य काजी एवं उम्दतुलमुल्क आला दबीर को दीवान-ए-इंशा के पद पर नियुक्त किया था।
- दिल्ली का कोतवाल और अलाउद्दीन का मित्र अलाउलमुल्क ही एक मात्र ऐसा व्यक्ति था, जिससे अलाउद्दीन शासन के विषय में सलाह लेता था अथवा वही उसे सलाह देने का साहस कर सका था।
- अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में निम्नलिखित विद्रोह हुए – (1) नव मुस्लिमों का विद्रोह (पहला विद्रोह) (2) अकत खाँ का विद्रोह (3) मंगू खाँ का विद्रोह व हाजी मौला का विद्रोह
- अलाउद्दीन के समकालीन अमीर खुसरो और उसके परवर्ती इसामी दोनों ने उसे ’एक भाग्यवादी व्यक्ति’ कहा है।
- अपने अनवरत युद्धों में अलाउद्दीन ने अपनी सल्तनत का प्रभावशाली विस्तार किया। उत्तर भारत में आधुनिक पंजाब, सिन्ध और उत्तरप्रदेश केन्द्रीय शासन के सीधे नियंत्रण में थे।
- अधिकांश मध्य भारत जिसमें चन्देरी, एलिचपुर, उज्जैन और माण्डू जैसे महत्त्वपूर्ण स्थान थे, केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त प्रान्तपतियों के सीधे नियन्त्रण में थे।
- राजपूताना, यादव, होयसल व काकतीय राज्य करद राज्य थे।
- गुजरात सल्तनत का एक प्रान्त था।
- पाण्ड्य राजाओं ने अलाउद्दीन का कभी आधिपत्य स्वीकार नहीं किया और न ही कोई कर दिया।
- बिहार, बंगाल, उड़ीसा तथा कश्मीर आदि प्रान्त दिल्ली सल्तनत से स्वतन्त्र थे।
- अलाउद्दीन के राजत्व सिद्धान्त के अनुसार ’राजा का कोई सगा सम्बन्धी नहीं होता।’
- विजयों और शत्रु को मित्र बनाने की नीति का पालन करने में अलाउद्दीन की तुलना अकबर से की जा सकती है।
- अलाउद्दीन सम्भवतः पहला शासक था, जिसने हिन्दू राजाओं को उनकी पूर्व स्थिति में रहने दिया और केवल कर वसूल किया।