अजमेर का चौहान वंश: इतिहास, वंशावली और महत्वपूर्ण प्रश्न | Ajmer ka Chauhan Vansh

अंतिम संशोधित (Last Updated): August 18, 2026

Last Updated on August 18, 2026 by KevalKrishan

अजमेर का चौहान वंश: इतिहास, वंशावली और संपूर्ण अध्ययन

आज के इस आर्टिकल में हम अजमेर का चौहान वंश (Ajmer ka Chauhan Vansh) के बारे में विस्तार से चर्चा करने वाले हैं। राजस्थान के इतिहास में अजमेर के चौहान राजवंश का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। इस लेख में प्रतियोगी परीक्षाओं (RPSC, RAS, REET, SI आदि) और सामान्य अध्ययन की दृष्टि से संपूर्ण जानकारी, वंशावली, प्रमुख शासक, उनके कार्य और महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) का पूरा निचोड़ प्रस्तुत किया गया है।

अजमेर के चौहान वंश की वंशावली

  • अजयराज चौहान – (1105–1130 ई.)

  • अर्णोराज / आन्नाजी – (1130–1155 ई.)

  • जग्ग्देव चौहान – (1155–1158 ई.)

  • बीसलदेव चौहान / विग्रहराज चतुर्थ – (1158–1163 ई.)

  • अपरगांगेय – (1163–1165 ई.)

  • पृथ्वीराज द्वितीय – (1165–1169 ई.)

  • सोमेश्वर चौहान – (1169–1177 ई.)

  • पृथ्वीराज चौहान तृतीय – (1177–1192 ई.)

अजमेर के चौहान वंश का इतिहास

सांभर के चौहान शासक पृथ्वीराज प्रथम के पुत्र अजयराज ने अजमेर के चौहान वंश की नींव रखी थी। यहाँ से चौहान साम्राज्य का एक नया और शक्तिशाली अध्याय शुरू हुआ।

1. अजयराज चौहान (1105–1130 ई.)

  • अजमेर नगर की स्थापना: अजयराज चौहान ने 1113 ई. में अजमेर (अजयमेरू) नामक नगर बसाया और बीठली पहाड़ी पर ‘अजयमेरू दुर्ग’ (तारागढ़) बनवाया। इतिहासकार विश्प हेबर ने ‘अजयमेरू दुर्ग’ (तारागढ़) को “राजस्थान का जिब्राल्टर” कहा है।
  • अजमेर के उपनाम: अजमेर को राजपूताने की कुँजी, राजस्थान का हृदय, अण्डों की टोकरी और भारत का मक्का कहा जाता है।
  • चाँदी/तांबे के सिक्के: इन्होंने ‘श्री अजयदेव’ व ‘अजयप्रिय द्रम्स’ नाम से चाँदी के सिक्के चलाए। इनके सिक्कों पर एक तरफ लक्ष्मी का चिह्न और दूसरी तरफ ‘अजयदेव’ खुदा हुआ मिलता है। कुछ सिक्कों पर रानी ‘सोमलवती / सोमलदेवी / सोमलेखा’ का नाम भी मिलता है।
  • राजधानी परिवर्तन: इन्होंने चौहानों की राजधानी ‘सांभर’ के स्थान पर ‘अजमेर’ को बनाया।
  • साम्राज्य निर्माण: इनका समय काल ‘चौहानों के साम्राज्य निर्माण का काल’ कहा जाता है।
  • नरवर्मन को पराजय: मालवा के परमार शासक नरवर्मन को उज्जैन पर आक्रमण कर हराया व उसके सेनापति ‘सुल्हाण’ को बंदी बनाया।
  • गजनी के शासक को पराजित करना: ‘पृथ्वीराज विजय’ (जयानक) के अनुसार इसने अपने राज्यकाल के प्रारम्भ में ही गजनी के शासक ‘गर्जन मातंग’ को हराया।
  • धार्मिक दृष्टिकोण: दिगम्बर व श्वेताम्बरों के बीच शास्त्रार्थ दंगल की अध्यक्षता की। ये जैन धर्म के अनुयायी थे।
  • तपस्या: अजयराज ने जीते जी राज्य का भार अर्णोराज को सौंपकर पुष्कर (कोंकण तीर्थ) के पास तपस्या करने चले गए।

2. आनाजी / अर्णोराज (1130–1155 ई.)

  • उपाधि: ‘परमभट्टारक महाराजधिराज परमेश्वर’। यह अजयराज का पुत्र था।
  • प्रमुख निर्माण: आनासागर झील (अजमेर), वराह मंदिर (पुष्कर)।
  • आनासागर झील का इतिहास: अर्णोराज ने अजमेर में नागपहाड़ व तारागढ़ के मध्य, तुर्कों की सेना (सुल्तान बहराम के गर्वनर बाइलिम की सेना) के संहार के बाद खून से रंगी धरती को साफ करने के लिए 1135-37 ई. में ‘चन्द्रा नदी’ के जल को रोककर आनासागर झील का निर्माण करवाया।
  • चालुक्य वंश से संबंध: अर्णोराज जब अजमेर की गद्दी पर बैठे, उस समय अर्णोराज व चालुक्य राजा जयसिंह के मध्य राज्य विस्तार के कारण 1134 ई. में मतभेद हुआ, बाद में दोनों के मध्य संधि हुई। चालुक्य राजा ‘जयसिंह’ ने अपनी पुत्री ‘कांचन देवी’ का विवाह अर्णोराज के साथ कर दिया।
  • सैन्य अभियान: अर्णोराज ने तुर्कों व मालवा के शासकों को पराजित किया, मगर गुजरात के शासक कुमारपाल चालुक्य से परास्त हुए।
  • दरबारी विद्वान: देवघोष और धर्मघोष इनके दरबार में प्रकाण्ड विद्वान थे।
  • पितृहंता: 1155 ई. में इसके बड़े पुत्र जग्गदेव ने अर्णोराज की हत्या कर दी।
  • संतान: अर्णोराज के चार पुत्र – जग्गदेव (पितृहंता), विग्रहराज चतुर्थ, अपरगांगेय और सोमेश्वर थे।

3. बीसलदेव / विग्रहराज चतुर्थ (1158–1163 ई.)

  • शासन प्राप्ति: बीसलदेव अपने पिता के हत्यारे पितृहंता जग्ग्देव को हटाकर शासक बने।
  • स्वर्णकाल: हर्षनाथ अभिलेख के अनुसार विग्रहराज चतुर्थ का शासनकाल सपादलक्ष के चौहानों का स्वर्णकाल कहलाता है।
  • कवि बान्धव: विद्वानों का आश्रयदाता होने के कारण जयानक भट्ट ने इन्हें ‘कवि बान्धव’ की उपाधि दी।
  • विस्तार: इसने चालुक्य शासक कुमारपाल से पाली, नागौर व जालौर के क्षेत्र विजित किए तथा भण्डानकों को भी पराजित किया।
  • गजनी के शासक की हार: विग्रहराज चतुर्थ ने गजनी के शासक खुशरूशाह मलिक को हराकर हिन्दू राजाओं को गजनी शासन से मुक्ति दिलाई।
  • दिल्ली पर अधिकार: 1157 ई. में दिल्ली के तौमर वंशीय शासक ‘तंवर’ को हराकर साम्राज्य का विस्तार किया। विग्रहराज दिल्ली पर अधिकार करने वाला प्रथम चौहान शासक था।
  • संस्कृत पाठशाला व अढ़ाई दिन का झोपड़ा: विग्रहराज ने 1153 ई. में अजमेर में एक संस्कृत पाठशाला बनवाई थी। मोहम्मद गौरी के सेनापति कुतुबद्दीन ऐबक ने इसे तुड़वाकर एक मस्जिद बनवा दी, जो राजस्थान की पहली मस्जिद कहलाई। इसे ‘अढ़ाई दिन का झोपड़ा’ कहते हैं।
  • कर्नल टॉड का कथन: कर्नल टॉड के अनुसार, “अढ़ाई दिन का झोपड़ा हिन्दू शिल्प कला का प्राचीनतम व पूर्ण परिष्कृत नमूना है।”
  • साहित्यिक रचनाएँ:
    • हरिकेली नाटक (संस्कृत भाषा): विग्रहराज द्वारा रचित इस नाटक में महाभारत काल में हुए अर्जुन व शिव के मध्य युद्ध का उल्लेख है।
    • ‘ललित विग्रहराज’: विग्रहराज के दरबारी विद्वान सोमदेव द्वारा रचित नाटक, जिसमें विग्रहराज एवं इन्द्रपुरी की राजकुमारी देसलदेवी के मध्य प्रेम सम्बन्धों का उल्लेख है।
    • बीसलदेव रासो: नरपति नाल्ह द्वारा रचित है। इसमें विग्रहराज चतुर्थ व परमार राजा भोज की बेटी राजमती के मध्य प्रेमकथा का उल्लेख है।
  • विद्वता की प्रशंसा: किलहॉर्न ने बीसलदेव की विद्वता की प्रशंसा करते हुए लिखा है कि— “वह उन हिन्दू शासकों में से एक व्यक्ति था, जो कालिदास और भवभूति की होड़ कर सकता था।”
  • अन्य निर्माण कार्य: राजमहल (टोंक) के पास बीसलपुर बसाकर यहाँ बीसल सागर झील बनवाई।
  • पशुवध पर प्रतिबंध: इन्होंने दरबारी विद्वान धर्मघोष सूरी के कहने पर ‘एकादशी के दिन पशुवध पर प्रतिबन्ध’ लगा दिया था।

4. अपरगांगेय (1163–1165 ई.)

जग्गदेव के पुत्र पृथ्वीराज द्वितीय ने अपरगांगेय की हत्या कर दी, इसके बाद पृथ्वीराज द्वितीय शासक बना।

5. पृथ्वीराज द्वितीय (1165–1169 ई.)

  • सुहवेश्वर शिव मंदिर (मेनाल): इस शिव मंदिर का निर्माण पृथ्वीराज द्वितीय की पत्नी सुहिया देवी ने करवाया था।
  • पृथ्वीराज द्वितीय की निःसंतान मृत्यु होने पर उसका चाचा सोमेश्वर (अर्णोराज का पुत्र) शासक बना।

6. सोमेश्वर चौहान (1169–1177 ई.)

  • यह अर्णोराज का सबसे छोटा पुत्र तथा कांचन देवी का पुत्र था।
  • सोमेश्वर ने कुमारपाल के कोंकण के शत्रु ‘मल्लिकार्जुन’ को परास्त किया।
  • इसने कलचुरी की राजकुमारी ‘कर्पुर देवी’ से विवाह किया जिससे दो पुत्र ‘पृथ्वीराज तृतीय’ व ‘हरिराज’ हुए।
  • सोमेश्वर ने अपने पिता अर्णोराज व स्वयं की मूर्ति बनाकर नवीन मूर्तिकला को प्रोत्साहन दिया।
  • सोमेश्वर 1177 ई. में आबू के शासक जैत्रसिंह की सहायता के लिए गए तो गुजरात के चालुक्य शासक भीम द्वितीय ने सोमेश्वर की हत्या कर दी।
  • बिजोलिया शिलालेख (1170 ई.) सोमेश्वर के समय का ही है।
  • सोमेश्वर ने ‘प्रताप लंकेश्वर’ की उपाधि धारण की थी।

7. पृथ्वीराज चौहान तृतीय (1177–1192 ई.)

श्रेणी विवरण
जन्म 1166 ई.
जन्मस्थान अन्हिलपाटन (गुजरात)
पिता सोमेश्वर
माता कर्पूरी देवी
पुत्र गोविंदराज
पत्नी संयोगिता
घोड़ा नाट्यरम्भा
संरक्षिका कर्पूरी देवी
उपाधियाँ दल पंगुल (विश्व विजेता), राय पिथौरा, गार्जिशपति (अचूक निशानेबाज), हिन्दू सम्राट
प्रधानमंत्री कदम्बवास / कैमास
सेनापति भुवनमल
शासनकाल 1177–1192 ई.
दरबारी विद्वान पृथ्वीराज विजय, वागीश्वर, जनार्दन, आशाधर, पृथ्वीभट्ट, विद्यापति गौड़, चंदरबरदाई
  • कम उम्र में राज्यारोहण: पृथ्वीराज तृतीय 1177 ई. को मात्र 11 वर्ष की अल्पायु में अजमेर का शासक बने। उनकी माता कर्पूरीदेवी ने एक वर्ष तक शासन संभाला और भुवनमल्ल (सेनापति) और कदम्बवास (प्रधानमंत्री) को पृथ्वीराज का संरक्षक बनाया। पृथ्वीराज ने 1178 ई. में शासन की बागडोर स्वयं संभाल ली।
  • गुड़गाँव का युद्ध (1178 ई.): पृथ्वीराज के चचेरे भाई नागार्जुन ने गुड़गाँव पर अधिकार कर लिया था। 1178 ई. में नागार्जुन और पृथ्वीराज तृतीय के मध्य हुए इस युद्ध में पृथ्वीराज विजयी रहे।
  • भण्डानकों का दमन (1182 ई.): भड़ानक सतलज प्रदेश से आई हुई एक जाति थी जो गुड़गाँव, हिसार, मथुरा, अलवर व भरतपुर तक फैल गई थी। 1182 ई. में पृथ्वीराज तृतीय ने भण्डानकों का दमन किया और उन्हें पराजित कर दिया।
  • तुमुल का युद्ध / महोबा का युद्ध (1182 ई.): महोबा के शासक परमार्दी देव और पृथ्वीराज के मध्य 1182 ई. में युद्ध हुआ, जिसमें परमार्दी देव के दो वीर सेनापति आल्हा व ऊदल बड़ी बहादुरी से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हो गए।
  • आबू का संघर्ष (1184 ई.): गुजरात के शासक भीमदेव द्वितीय और पृथ्वीराज के मध्य आबू की परमार राजकुमारी इच्छिनी देवी को लेकर विवाद था। भीमदेव इच्छिनी से विवाह करना चाहता था, लेकिन पृथ्वीराज ने इच्छिनी से विवाह कर लिया, जिससे दोनों के मध्य संघर्ष हुआ।
  • संयोगिता अपहरण: पृथ्वीराज रासो के अनुसार कन्नौज के शासक जयचन्द गहड़वाल की पुत्री संयोगिता थी। पृथ्वीराज संयोगिता को अपने घोड़े पर बैठाकर ले गए, जिसके कारण दोनों के मध्य शत्रुता उत्पन्न हुई।
  • तराइन का प्रथम युद्ध (1191 ई.): मोहम्मद गौरी ने तबरहिन्द पर अधिकार कर लिया जिसपर पृथ्वीराज अपना अधिकार जताते थे। इस युद्ध में पृथ्वीराज चौहान तृतीय विजयी रहे।
  • तराइन का द्वितीय युद्ध (1192 ई.): मोहम्मद गौरी और पृथ्वीराज चौहान के मध्य 1192 ई. में पुनः युद्ध हुआ जिसमें दुर्भाग्यवश पृथ्वीराज की हार हुई और उन्हें सिरसा के नजदीक पकड़ लिया गया।
  • अंतिम घटना: गौरी पृथ्वीराज को बंदी बनाकर गजनी ले गया और दरबार में उनकी दोनों आँखें फुड़वा दीं। पृथ्वीराज चौहान के दरबारी कवि चंदबरदाई भी गजनी पहुँचे और दोनों ने मिलकर मोहम्मद गौरी को मारने की योजना बनाई। इस संबंध में चंदबरदाई का प्रसिद्ध दोहा है:
“चार बाँस चौबीस गज, अष्ट अंगुल प्रमाण।
तां ऊपर सुल्तान है, मत चुके चौहान।।”
इसे सुनकर पृथ्वीराज तृतीय ने ‘शब्दभेदी बाण’ चलाकर गौरी की हत्या कर दी।

निष्कर्ष

आज के आर्टिकल में हमने अजमेर का चौहान वंश (Ajmer ka Chauhan Vansh) के इतिहास, वंशावली, प्रमुख शासकों और उनके ऐतिहासिक योगदान को विस्तार से कवर किया। हम आशा करते हैं कि यह जानकारी आपकी प्रतियोगी परीक्षाओं और सामान्य ज्ञान को मजबूत करने में बेहद मददगार साबित होगी।

अजमेर चौहान वंश: महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)

Q1. ‘आनासागर झील’ का निर्माण किनके द्वारा कराया गया?
(अ) आनाजी चौहान (✓)
(ब) जहाँगीर
(स) पृथ्वीराज चौहान
(द) शाहजहाँ
Q2. अजमेर में रानी सोमलेखा के सिक्के मिलते हैं, यह किस चौहान शासक की पत्नी थी?
(अ) अर्णोराज
(ब) अजयराज (✓)
(स) विग्रहराज
(द) पृथ्वीराज प्रथम
Q3. सुल्तान मुहम्मद गौरी को वर्ष 1191 ई. में किसने पराजित किया, लेकिन वर्ष 1192 ई. में वह उससे हार गया?
(अ) पृथ्वीराज तृतीय (✓)
(ब) राजराज प्रथम
(स) राजेन्द्र प्रथम
(द) रामनराजा द्वितीय
Q4. पृथ्वीराज चौहान का दरबारी कवि कौन था?
(अ) रामानुज
(ब) चंदबरदाई (✓)
(स) हरिहर
(द) बाणभट्ट
Q5. ’महोबा का युद्ध’ (1182 ई.) किन-किन के मध्य लड़ा गया?
(अ) पृथ्वीराज चौहान व जयचंद गहड़वाल
(ब) पृथ्वीराज चौहान व आल्हा व ऊदल के मध्य (✓)
(स) पृथ्वीराज चौहान व भीम द्वितीय
(द) पृथ्वीराज चौहान व मुहम्मद गौरी
Q6. सूफी संत ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती किसके काल में राजस्थान आए थे?
(अ) विग्रहराज चतुर्थ
(ब) अजयराज
(स) अर्णोराज
(द) पृथ्वीराज तृतीय (✓)
Q7. विद्वानों का आश्रय दाता होने के कारण विग्रहराज चतुर्थ को क्या कहा जाता है?
(अ) महाराजाधिराज
(ब) परमगुरु
(स) परम भट्टारक
(द) कवि बान्धव (✓)
Q8. पृथ्वीराज तृतीय के शासनकाल के दौरान महोबा पर किसका शासन था?
(अ) चंदेल वंश (✓)
(ब) गढ़वाल वंश
(स) परमार वंश
(द) तोमर वंश
Q9. विख्यात स्मारक ’अढ़ाई दिन का झोपड़ा’ या तत्कालीन ’संस्कृत महाविद्यालय’ का निर्माण किसके द्वारा किया गया?
(अ) अर्णोराज
(ब) विग्रहराज चतुर्थ (✓)
(स) अजयराज
(द) पृथ्वीराज प्रथम
Q10. पृथ्वीराज चौहान ने परमार्दी देव के वीर सेनानायक आल्हा-ऊदल को किस युद्ध में पराजित किया था?
(अ) पाहोबा का युद्ध (✓)
(ब) सुमेल युद्ध
(स) बाड़ी का युद्ध
(द) तराईन का प्रथम युद्ध
Q11. निम्नलिखित में से कौनसी उपाधि पृथ्वीराज चौहान ने धारण की?
(अ) महाराजाधिराज
(ब) दल पुंगल (✓)
(स) हिन्दुआ सूरज
(द) हिन्दूपत
Q12. ’वराह मंदिर’ का निर्माण किस चौहान शासक ने करवाया था?
(अ) पृथ्वीराज चौहान
(ब) अर्णोराज (✓)
(स) विग्रहराज चतुर्थ
(द) गुवक प्रथम
Q13. अजमेर में ’चौहान वंश’ का अंतिम शासक कौन था?
(अ) अर्णोराज
(ब) सोमेश्वर
(स) पृथ्वीराज तृतीय (✓)
(द) विग्रहराज चतुर्थ
Q14. ’विद्यापति गौड़, विश्वरूप, जयानक भट्ट, वागीश्वर’ किस चौहान शासक के दरबारी कवि थे?
(अ) आनाजी
(ब) पृथ्वीराज तृतीय (✓)
(स) अजयराज
(द) विग्रहराज चतुर्थ
अजमेर नगर की स्थापना किसने और कब की थी?
अजमेर नगर की स्थापना अजयराज चौहान ने 1113 ई. में की थी। उन्होंने ही बीठली पहाड़ी पर ‘अजयमेरू दुर्ग’ (तारागढ़) का निर्माण करवाया था।
अजमेर के किस शासक का काल 'चौहानों का स्वर्णकाल' कहलाता है?
विग्रहराज चतुर्थ (बीसलदेव) का शासनकाल सपादलक्ष के चौहानों का स्वर्णकाल कहलाता है। उन्हें ‘कवि बान्धव’ की उपाधि भी दी गई थी।
अढ़ाई दिन का झोपड़ा का निर्माण मूलतः किस उद्देश्य से हुआ था?
‘अढ़ाई दिन का झोपड़ा’ मूलतः विग्रहराज चतुर्थ द्वारा 1153 ई. में बनवाई गई एक ‘संस्कृत पाठशाला’ थी, जिसे बाद में कुतुबद्दीन ऐबक ने तुड़वाकर मस्जिद में परिवर्तित करवा दिया था।
पृथ्वीराज चौहान तृतीय के शासनकाल के प्रमुख दरबारी कवि कौन थे?
पृथ्वीराज तृतीय के दरबार में जयानक भट्ट (पृथ्वीराज विजय के रचयिता), चंदरबरदाई (पृथ्वीराज रासो के रचयिता), वागीश्वर, जनार्दन, आशाधर, पृथ्वीभट्ट और विद्यापति गौड़ जैसे विद्वान थे।

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