अव्ययीभाव समास(Avyayibhav Samas): अव्ययीभाव समास में प्रथम पद (पूर्व पद) प्रधान होता है और इसमें समस्त पद का रूप किसी भी लिंग, वचन, काल आदि के कारण नहीं बदलता है। अव्ययीभाव समास में समस्त पद क्रिया विशेषण ‘अव्यय’ की भांति कार्य करता है।
अव्ययीभाव समास – Avyayibhav Samas
‘अव्ययीभाव’ शब्द ‘अव्यय’ से बना है। वे शब्द जिनमें लिंग, वचन, कारक, काल के कारण वाक्य में प्रयुक्त होने पर कोई परिवर्तन नहीं होता बल्कि ज्यों के त्यों बने रहते हैं, उन्हें अव्यय कहते हैं। फलतः अव्ययीभाव समास में सम्पूर्ण सामासिक पद क्रिया विशेषण ‘अव्यय’ की तरह प्रयुक्त होता है तथा प्राय: पहला पद प्रधान रहता है।
अव्ययीभाव समास की परिभाषा :
जिस समास में प्रथम पद प्रधान होता है, उसे अव्ययीभाव समास(Avyayibhav Samas) कहते है। इस समास में इसका प्रथम पद उपसर्ग/अव्यय होता है और दूसरा पद संज्ञा होता है । सामासिक विग्रह करते समय संज्ञा का स्थान पहले और उपसर्ग/अव्यय का स्थान बाद में हो जाता है।
अव्ययीभाव समास के भेद
अव्ययी भाव समास के दो भेद होते हैं –
- पूर्वपद अव्ययीभाव समास
- उत्तरपद अव्ययीभाव समास।
अव्ययीभाव समास की पहचान कैसे करें?
अव्ययीभाव सामासिक पद में निम्नलिखित विशेषताएं होती हैं-
- अव्ययीभाव में प्राय: पहला पद प्रधान होता है।
- पहला पद या पूरा पद अव्यय होता है।
- पुनरुक्त या द्विरुक्त पद भी अव्ययीभाव समास होते हैं।
- ‘उपसर्ग’ युक्त शब्द भी अव्ययीभाव समास होते हैं।
- इस समास का पूर्व पद कोई अविकारी शब्द होता है।
- इस समास में पदों की पुनरावृत्ति होती है या प्रत्यय के रूप में ’अनुसार, पूर्वक, उपरांत जुड़े रहते हैं।’
अव्ययीभाव समास के नियम :
यह समास प्रायः अनिवार्य होता है, इसलिए इसमें दोनों पदों का कभी स्वतंत्र, पृथक् प्रयोग ही नहीं होता, सदा दोनों पद समस्त ही रहते हैं। इसलिए विग्रह करने पर इसका एक ही पद रखा जाता है, दूसरे पद के बदले कोई दूसरा ही शब्द रखना पड़ता है, जैसे – यथाशक्ति। यह शब्द क्रिया-विशेषण अव्यय है। इसमें प्रथम खण्ड ’यथा’ अव्यय है। प्रधानता भी उसी की है, द्वितीय पद शक्ति की नहीं। इसका अपने पदों के साथ विग्रह नहीं हो सकता, ’शक्ति के यथा’ नहीं कह सकते। विग्रह में ’यथा’ के बदले उसका कोई पर्याय ’अनुसार’ आदि देना होगा। इस प्रकार इस शब्द का विग्रह होगा ’शक्ति के अनुसार’।
1. जिस पद में पहला पद ’आ’ उपसर्ग से बना हो तो उसके सामासिक विग्रह में पद के अन्त में ’तक’ लिखा जाता है। जैसे –
- आजीवन – जीवन रहने तक
- आमरण – मरण तक
- आजानुबाहु – बाहु से जानु (घुटने) तक
2. जिस पद में पहला पद बे, नि, ना, निर्, निस् उपसर्ग से बना हो तो उसके विग्रह में अन्त में प्रायः ’रहित’ जोड़ते हैं अथवा प्रारम्भ में ’बिना’ शब्द लिख दिया जाता है। जैसे –
- निर्विवाद – विवाद से रहित
- निर्विकार – विकार से रहित
- बेदाग – बिना दाग के
- नासमझ – बिना समझ के
- नालायक – जो लायक नहीं
3. अव्यय शब्द ’यथा’ से बने शब्दों का विग्रह पद के अन्त में ’के अनुसार’ लिखकर अथवा प्रारम्भ में जैसा/जैसी लिखकर करते हैं। जैसे –
- यथागति – गति के अनुसार
- यथाशक्ति – शक्ति के अनुसार
- यथासम्भव – जैसा सम्भव है
- यथायोग्य – जो जितना है योग्य
4. ’प्रति’ उपसर्ग से बने शब्दों का विग्रह करते समय प्रायः मुख्य शब्द को दो बार लिख देते हैं अथवा उस शब्द से पहले ’हर’ शब्द जोड़ देते हैं। जैसे –
- प्रतिदिन – हर दिन
- प्रतिक्षण – हर क्षण
- प्रत्यंग – हर अंग
- प्रतिशत – हर शत
- प्रतिबिंब – बिंब का बिंब
- प्रत्यारोप – आरोप के बदले आरोप
अव्ययीभाव समास के उदाहरण
आपको सुविधा के लिए अव्ययीभाव समास के 50 से ऊपर उदाहरण और इनका सामासिक विग्रह दिया गया है ,इससे आप अच्छे से इस समास को समझ पाओगे।
अव्यय शब्द से बने सामासिक पद –
| सामासिक पद | सामासिक विग्रह |
| यथाशक्ति | शक्ति के अनुसार |
| यथाविधि | विधि के अनुसार |
| यथाक्रम | क्रम के अनुसार |
| यथायोग्य | योग्यता के अनुसार |
| यथार्थ | जैसा वास्तव में अर्थ है |
| यथासाध्य | जितना सीधा जा सके |
| यथासम्भव | जितना सम्भव हो सके |
| यथोचित | उचित के अनुसार |
| यथासमय | जो समय निर्धारित है |
| यथावसर | अवसर के अनुसार |
| यथाशीघ्र | जितना शीघ्र हो |
| यथानुरूप | उसी के अनुरूप |
उपसर्ग से बने सामासिक पद –
| सामासिक पद | सामासिक विग्रह |
| प्रत्यक्ष | अक्षि के समक्ष |
| प्रतिक्षण | हर क्षण |
| प्रतिपल | हर पल |
| प्रत्येक | हर एक |
| आपादमस्तक | पाद से लेकर मस्तक पर्यन्त |
| प्रतिध्वनि | ध्वनि की ध्वनि |
| प्रतिदिन | हर दिन |
| प्रत्यंग | प्रत्येक अंग |
| प्रतिघात | घात के बदले किया गया घात |
| प्रतिशत | प्रत्येक शत |
| प्रत्याघात | आघात के बदले किया गया आघात |
| प्रतिद्वन्द्वी | विरोधी, द्वन्द्व करने वाले का प्रतिपक्षी |
| प्रत्याशा | आशा के बदले की गई आशा |
| प्रतिबिम्ब | बिम्ब का बिम्ब |
| प्रतिहिंसा | हिंसा के बदले की गई हिंसा |
| प्रतिलिपि | लिपि के समकक्ष लिपि |
| प्रत्युत्तर | उत्तर के बदले दिया गया उत्तर |
| आजानु | घुटने तक |
| आजन्म | जन्म से |
| आजीवन | जीवन पर्यन्त |
| आकंठ | कंठ तक |
| अनुचिंतन | चिंतन के बाद किया जाने वाला चिंतन |
| आरक्षण | भलीभाँति रक्षण किया हुआ |
| आपूर्ण | पूरी तरह से भरा हुआ |
| आसमुद्र | समुद्र पर्यन्त |
| आमरण | मरण तक |
| अकारण | बिना कारण के |
| अनुकरण | करण के अनुसार करना |
| अनुबंध | बंध की तरह का बंध |
| अनुगमन | गमन के पीछे गमन |
| अनुसरण | सरण के बाद सरण |
| अनुक्रम | क्रमानुसार |
| निधड़क | बिना धड़क के |
| निडर | बिना डर के |
| नियमन | ठीक तरह से यमन |
| निकम्मा | काम न करने वाला |
| निगोड़ा | बिना गोड़ (पैर) के |
| नियोग | ठीक तरह से योग |
| सानंद | आनंद सहित |
| सपरिवार | परिवार सहित |
| सपत्नीक | पत्नी सहित |
| सावधान | अवधान सहित |
| सप्रसंग | प्रसंग सहित |
| सप्रमाण | प्रमाण सहित |
| सकुशल | कुशलता के साथ |
| अत्युत्तम | उत्तम से उत्तम |
| अतिवृष्टि | वृष्टि की अति |
| अतिरिक्त | रिक्त से अलावा |
| अत्यन्त | अंत से अधिक |
| अत्यल्प | बहुत ही अल्प |
| सपरिणाम | परिणाम के सहित |
| अतीन्द्रिय | इन्द्रियों से अतीत |
| अत्याचार | आचार का अतिक्रमण |
| अत्यधिक | अधिक से अधिक |
| निर्विवाद | विवाद से रहित |
| नीरोग | रोग से रहित |
| निर्दोष | दोष से रहित |
| निर्भय | भय से रहित |
| निरामिष | आमिष से रहित |
| निर्धन | धन से रहित |
| नीरंध्र | रंध्र से रहित |
| नीरव | ध्वनि से रहित |
| नीरस | रस से रहित |
पुनरुक्ति वाले सामासिक पद –
| सामासिक पद | सामासिक विग्रह |
| हाथोंहाथ | हाथ ही हाथ में |
| रातोंरात | रात ही रात में |
| दिनोंदिन | दिन के बाद दिन |
| एकाएक | एक के बाद तुरन्त एक |
| घर-घर | प्रत्येक घर, घर के बाद घर |
| बीचोंबीच | ठीक बीच में |
| साफ-साफ | साफ के बाद साफ |
| दिन-दिन | प्रत्येक दिन |
| कानोंकान | कान ही कान में |
| लूटमलूट | लूट के बाद लूट |
| सुनासुनी | सुनने के बाद सुनना |
| घड़ी-घड़ी | हर घड़ी |
| मन्द-मन्द | बहुत ही मन्द |
| धीरे-धीरे | धीरे के बाद धीरे |
| चलाचली | चलने के बाद चलना |
| मारामारी | मार के बाद मार |
| एकाएक | एक के बाद एक |
| बार-बार | बार के बाद बार |
| भागमभाग | भागने के बाद भागना |
| पल-पल | प्रत्येक पल |
| धड़ाधड़ | धड़ के बाद पुनः धड़ |
निष्कर्ष :
आज के आर्टिकल में हमने हिंदी व्याकरण के अंतर्गत अव्ययीभाव समास (Avyayibhav Samas) को पढ़ा, हम आशा करतें है, कि आपको यह समास अच्छे से समझ में आ गया होगा …धन्यवाद। अगर आपको हमारे द्वारा उपलब्ध करवाया गया आर्टिकल अच्छा लगे तो शेयर जरुर करें।
FAQs –
1. अव्ययीभाव समास की परिभाषा एवं उदाहरण लिखो
उत्तर – जिस समास में प्रथम पद प्रधान हो,उसे अव्ययीभाव समास (Avyayibhav Samas) समास कहते है।
अव्ययीभाव समास के 10 उदाहरण :
- आ-आमरण, आजीवन, आकण्ठ, आजन्म, आपादमस्तक, आसमुद्र, आजानु
- निडर = बिना डर के
- बेवजह = बिना वजह के
- निर्विकार = बिना विकार के
- यथागति, यथाशक्ति, यथोचित, यथाक्रम, यथायोग्य
- प्रतिदिन, प्रतिमाह, प्रतिक्षण, प्रत्येक, प्रतिलिपि, प्रत्युत्तर
- पुनरावृत्ति-चलाचली, मारामारी, लूटमलूट, साफसाफ, हाथोंहाथ, एकाएक
- मरणोपरान्त, सपरिवार, सपत्नीक, निकम्मा, दिनभर, भरपेट
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