अंतिम संशोधित (Last Updated): October 16, 2026
Last Updated on October 16, 2026 by KevalKrishan

लूनी नदी पश्चिमी राजस्थान की सबसे लंबी नदी है। यह अजमेर के पास अरावली की नाग पहाड़ी से निकलती है। कुल लंबाई लगभग 495 किमी और राजस्थान में लगभग 330 किमी है। यह अजमेर, नागौर, पाली, जोधपुर, बाड़मेर और जालौर से बहती हुई गुजरात के कच्छ के रण में विलीन हो जाती है। इसे “मारवाड़ की गंगा” और “आधी मीठी, आधी खारी नदी” कहा जाता है।
लूनी नदी का मैप – Luni Nadi Map

Luni River Full Detail in Hindi
| उद्गम | नाग पहाड़ी, अजमेर (शुरू में नाम सागरमती) |
| अन्य नाम | सागरमती, साकरी, लवणवती, मारवाड़ की गंगा, आधी मीठी-आधी खारी |
| समाप्ति | कच्छ का रण (गुजरात) |
| कुल लंबाई | लगभग 495 किमी |
| राजस्थान में लंबाई | लगभग 330 किमी (कुछ पुस्तकों में 350 किमी) |
| बहाव के जिले | अजमेर, नागौर, पाली, जोधपुर, बाड़मेर, जालौर |
| प्रमुख सहायक नदियाँ | जोजड़ी, गुहिया, बांडी, लीलड़ी, मीठड़ी, सुकड़ी, जवाई, खारी, सागी |
| प्रमुख बाँध | जसवंत सागर (पिचियाक, जोधपुर) |
नोट: पुराने पोस्ट में राजस्थान में लंबाई कहीं 395 किमी और कहीं 330 किमी लिखी थी। यहाँ 330 किमी रखी है, जो अधिकांश पुस्तकों में मिलती है।
लूनी नदी की पूरी जानकारी – Luni Nadi ki Jankari
- अजमेर में सागरमती और सरस्वती नदियाँ मिलने के बाद इसका नाम लूनी पड़ जाता है। संगम गोविंदगढ़ (पुष्कर) के पास माना जाता है।
- उद्गम से बालोतरा तक पानी मीठा रहता है, उसके बाद खारा हो जाता है। इसीलिए इसे “आधी मीठी, आधी खारी” कहते हैं। संस्कृत में इसका नाम लवणवती (नमकीन नदी) है।
- यह राजस्थान के अरब सागर वाले बेसिन की सबसे बड़ी नदी है और अंततः कच्छ के रण में लुप्त हो जाती है, समुद्र तक नहीं पहुँचती। इसलिए इसे अंतःप्रवाही भी कहा जाता है।
- नदी का निचला बेसिन (पाली-जालौर क्षेत्र) गोड़वाड़ कहलाता है। जालौर क्षेत्र में इसके बाढ़ क्षेत्र को “रेल” या “नेहड़/नाड़ा” कहा जाता है।
- यह पूर्ण रूप से बरसाती नदी है। अधिक वर्षा में बालोतरा तक बाढ़ आती है।
- पाली, जसोल और बालोतरा के रंगाई-छपाई उद्योगों से नदी में प्रदूषण की समस्या है।
- तिलवाड़ा (बालोतरा क्षेत्र) में संत मल्लीनाथ पशु मेला लगता है।
- यह अरावली पर्वतमाला को मध्य भाग में काटकर पश्चिम की ओर बढ़ती है।
लूनी नदी की सहायक नदियाँ –
| सहायक नदी | उद्गम | लूनी से मिलने की दिशा |
|---|---|---|
| जोजड़ी | पोडलू (पांडलू) गाँव, नागौर | दायाँ (एकमात्र) |
| गुहिया | पाली | बायाँ (बांडी में मिलती है) |
| बांडी | हेमावास, पाली | बायाँ |
| लीलड़ी | सोजत, पाली | बायाँ |
| मीठड़ी | पाली | बायाँ |
| सुकड़ी | देसूरी, पाली | बायाँ |
| जवाई | गौराइया (पाली) | बायाँ |
| खारी | शेरगाँव की पहाड़ियाँ, सिरोही | बायाँ (जवाई में मिलती है) |
| सागी | जसवंतपुरा की पहाड़ियाँ, जालौर | बायाँ |
प्रमुख सहायक नदियों से जुड़े तथ्य
- जोजड़ी: लूनी की एकमात्र सहायक नदी, जो दाएँ किनारे से मिलती है। इसका उद्गम अरावली से नहीं है।
- बांडी: पाली के रंगाई-छपाई उद्योग के कारण “रासायनिक नदी” और सर्वाधिक प्रदूषित नदियों में गिनी जाती है। हेमावास बाँध इसी पर है।
- सुकड़ी: बाँकली बाँध (जालौर) इसी पर है।
- जवाई: जवाई बाँध (सुमेरपुर, पाली) इसी पर है। यह पश्चिमी राजस्थान का सबसे बड़ा बाँध है और “मारवाड़ का अमृत सरोवर” कहलाता है।
- खारी: सिरोही से निकलकर जवाई में मिलती है।
अभ्यास प्रश्न (उत्तर सहित)
प्र.1 लूनी नदी का उद्गम कहाँ से है?
(A) गोगुंदा (B) नाग पहाड़ी, अजमेर (C) सिरोही (D) जालौर
उत्तर: (B) नाग पहाड़ी, अजमेर
प्र.2 लूनी नदी की कुल लंबाई लगभग कितनी है?
(A) 295 किमी (B) 395 किमी (C) 495 किमी (D) 595 किमी
उत्तर: (C) 495 किमी
प्र.3 लूनी नदी का पानी किस स्थान तक मीठा रहता है?
(A) पुष्कर (B) बालोतरा (C) जालौर (D) सांचौर
उत्तर: (B) बालोतरा
प्र.4 लूनी की एकमात्र सहायक नदी, जो दाएँ किनारे से मिलती है, कौन-सी है?
(A) बांडी (B) जवाई (C) जोजड़ी (D) सुकड़ी
उत्तर: (C) जोजड़ी
प्र.5 लूनी नदी कहाँ लुप्त होती है?
(A) थार मरुस्थल में (B) कच्छ के रण में (C) चंबल में (D) अरब सागर में सीधे
उत्तर: (B) कच्छ के रण में
प्र.6 “मारवाड़ का अमृत सरोवर” किसे कहा जाता है?
(A) जसवंत सागर (B) जवाई बाँध (C) हेमावास बाँध (D) बाँकली बाँध
उत्तर: (B) जवाई बाँध
प्र.7 “रासायनिक नदी” किस नदी को कहा जाता है?
(A) जोजड़ी (B) बांडी (C) सागी (D) खारी
उत्तर: (B) बांडी
प्र.8 जसवंत सागर बाँध किस स्थान पर है?
(A) सुमेरपुर (B) पिचियाक (जोधपुर) (C) बालोतरा (D) जालौर
उत्तर: (B) पिचियाक, जोधपुर
FAQ – Luni Nadi
लूनी नदी का उद्गम कहाँ है?
अजमेर के पास अरावली की नाग पहाड़ी से, जहाँ इसे सागरमती कहा जाता है।
लूनी नदी की कुल लंबाई कितनी है?
लगभग 495 किमी, जिसमें राजस्थान में लगभग 330 किमी है।
लूनी नदी को “मारवाड़ की गंगा” क्यों कहते हैं?
क्योंकि यह मारवाड़ (पश्चिमी राजस्थान) की सबसे बड़ी नदी है और इस क्षेत्र की जीवनरेखा मानी जाती है।
लूनी को “आधी मीठी, आधी खारी” क्यों कहते हैं?
उद्गम से बालोतरा तक इसका पानी मीठा है, उसके बाद लवणों के कारण खारा हो जाता है।
लूनी की प्रमुख सहायक नदियाँ कौन-सी हैं?
जोजड़ी, गुहिया, बांडी, लीलड़ी, मीठड़ी, सुकड़ी, जवाई, खारी और सागी।
क्या लूनी नदी समुद्र में मिलती है?
नहीं। यह कच्छ के रण में लुप्त हो जाती है, इसलिए इसे अंतःप्रवाही कहा जाता है।
लूनी नदी पर कौन-सा बाँध है?
जसवंत सागर बाँध (पिचियाक, जोधपुर) मुख्य है।
निष्कर्ष – Luni Nadi
लूनी नदी नाग पहाड़ी (अजमेर) से निकलकर पश्चिमी राजस्थान से गुजरती हुई कच्छ के रण में विलीन हो जाती है। बालोतरा के बाद इसका पानी खारा हो जाता है। परीक्षा के लिए उद्गम, लंबाई, सहायक नदियों के उद्गम और दिशा, जोजड़ी का दायाँ किनारा, और जवाई-बांडी जैसे तथ्य याद रखें।
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संदर्भ: लूनी नदी